Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Jab mai mediation krti hu meri body agge pichhe hoti hai mere hath khud chlte puri body ko touch krte hai.. sr pe maathe pe sr ke piche points ko khud press krte agr mai ek ghnta medition kru to ek ghnta movements chli hai.. plz aap bta skte ho ye kya hai ?

 Jab mai mediation krti hu meri body agge pichhe hoti hai mere hath khud chlte puri body ko touch krte hai.. sr pe maathe pe sr ke piche points ko khud press krte agr mai ek ghnta medition kru to ek ghnta movements chli hai.. plz aap bta skte ho ye kya hai ?


ध्यान के दौरान शरीर का आगे-पीछे होना और हाथों का अपने आप शरीर के विभिन्न हिस्सों को छूना ऊर्जा जागरण का संकेत हो सकता है। यह कुंडलिनी शक्ति के जागरण के लक्षण हो सकते हैं। जब शरीर में ऊर्जा का प्रवाह तेज़ होता है, तो शरीर अपने आप संतुलन बनाने का प्रयास करता है। सिर, माथे और सिर के पीछे के बिंदु दबाना सहस्रार चक्र और आज्ञा चक्र की सक्रियता को दर्शाता है। इसे नियंत्रित करने के लिए मूलाधार चक्र पर ध्यान केंद्रित करें, भ्रामरी प्राणायाम करें और ध्यान के बाद शांत बैठें। 🙏🌸

Comments

  1. Japp krte samye mery mathe ka center point m thandk hoti hai... Mery ear m ek awaz ati rehti hai jase beep ki awaz har samye ati hai.. Esa kyu?

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