Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Jab me dhyan karti hu to kuch samay bad meri gardan par jhtka lagta he or gardan kundali ke aakaar me ghumti hui sthir ho jaati he or me ghre dhyan me chli jaati hu esa kiu ho raha he krupya batay ?

 Jab me dhyan karti hu to kuch samay bad meri gardan par jhtka lagta he or gardan kundali ke aakaar me ghumti hui sthir ho jaati  he or me ghre dhyan me chli jaati hu esa kiu ho raha he krupya batay ?


प्रणाम 🙏

जब ध्यान के दौरान आपकी गर्दन में झटका लगता है और फिर यह कुंडली के आकार में घूमकर स्थिर हो जाती है, तो यह संकेत है कि कुंडलिनी ऊर्जा सक्रिय हो रही है

संभावित कारण:

  1. ऊर्जा प्रवाह – कुंडलिनी जब उठती है, तो रीढ़ और गर्दन में स्वतः गति उत्पन्न हो सकती है।

  2. अतिरिक्त ऊर्जा संतुलन खोज रही है – यदि चक्र संतुलित न हों, तो यह हलचल हो सकती है।

  3. आत्मसमर्पण का संकेत – ऊर्जा जब सही मार्ग पर जाती है, तो ध्यान गहरा हो जाता है।

क्या करें?

  • डरें नहीं, इसे सहज होने दें

  • मूलाधार चक्र पर ध्यान दें, ताकि ऊर्जा संतुलित हो

  • शरीर को आरामदायक स्थिति में रखें और जबरदस्ती न रोकें। 🚩

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