Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Mere third eye per vibration hoti rahti hai par mujhe kuch dekhta nhi sir mujhe kya karna sahi hoga ?

 Mere third eye per vibration hoti rahti hai par mujhe kuch dekhta nhi sir mujhe kya karna sahi hoga ?


अगर आपकी थर्ड आई (आज्ञा चक्र) पर लगातार वाइब्रेशन होती रहती है, लेकिन आपको कुछ दिखाई नहीं देता, तो इसका मतलब है कि ऊर्जा सक्रिय हो रही है, लेकिन पूरी तरह जागृत नहीं हुई

क्या करें?

  1. धैर्य रखें – थर्ड आई धीरे-धीरे खुलती है, तुरंत कुछ दिखना जरूरी नहीं।

  2. मूलाधार चक्र को मजबूत करें – इससे ऊर्जा संतुलित होगी और अनुभव स्थिर होंगे।

  3. अति प्रयास न करें – जबरदस्ती देखने की कोशिश न करें, यह स्वाभाविक रूप से होगा।

  4. ओम मंत्र या त्राटक ध्यान करें – इससे आज्ञा चक्र की ऊर्जा संतुलित होगी। 🚩

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