Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Muje roj sone se pehle srir me tej tej jhtke lgte hai khas kar pero se pet tk . Ye bhot hi becheni bhre hote hai me kuch pl bhi chain se let nhi pati Par ye din me nhi hota ?

 Muje roj sone se pehle srir me tej tej jhtke lgte hai khas kar pero se pet tk . Ye bhot hi becheni bhre hote hai me kuch pl bhi chain se let nhi pati Par ye din me nhi hota ?


रात को सोने से पहले शरीर में तेज-तेज झटके (jerks) लगना, खासकर पैरों से पेट तक, यह संकेत है कि आपकी ऊर्जा प्रणाली (Energy System) सक्रिय हो रही है

संभावित कारण:

  1. कुंडलिनी जागरण – ऊर्जा प्रवाह तेज होने से शरीर में झटके महसूस होते हैं।

  2. नर्वस सिस्टम की संवेदनशीलता – ध्यान और साधना से शरीर की ऊर्जा प्रणाली अधिक संवेदनशील हो सकती है।

  3. असंतुलित ऊर्जा – यदि मूलाधार चक्र मजबूत नहीं है, तो ऊर्जा ऊपर जाकर असंतुलन पैदा कर सकती है।

उपाय:

  • सोने से पहले ग्राउंडिंग करें (नंगे पैर घास पर चलें)।

  • मूलाधार चक्र पर ध्यान दें

  • हल्का योग और प्राणायाम करें। 🚩

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