Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Mujhe Dhyan ke baad भूख bahut lagati hai......kya ye sahi hai

 Mujhe Dhyan ke baad भूख bahut lagati hai......kya ye sahi hai ?


हाँ, ध्यान के बाद भूख लगना एक सामान्य अनुभव है, खासकर जब ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। जब आप ध्यान करते हैं, तो शरीर की प्राण ऊर्जा सक्रिय हो जाती है, जिससे चयापचय (metabolism) तेज हो सकता है, और परिणामस्वरूप भूख बढ़ सकती है। यह दर्शाता है कि आपकी साधना प्रभावी हो रही है। लेकिन अगर बहुत ज्यादा भूख लग रही है, तो ध्यान के बाद हल्का और सात्त्विक भोजन करें। क्या यह हर ध्यान सत्र के बाद होता है या कभी-कभी?

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