Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

सिर के मध्य में गड्ढे जैसा महसूस होता है pilpila sa हो गया waha से मैं 3 साल से meditation मैं regular hu .. सारे chakras का ओपन होना महसूस होता है aaj तक कोई भी दिक्कत महसूस नहीं हुई थी bus yahi सर के मध्य में हल्का गहराई c महसूस होती है अब लास्ट 3 month से...

 सिर के मध्य में गड्ढे जैसा महसूस होता है pilpila sa हो गया waha से मैं 3 साल से meditation मैं regular hu .. सारे chakras का ओपन होना महसूस होता है aaj तक कोई भी दिक्कत महसूस नहीं हुई थी bus yahi सर के मध्य में हल्का गहराई c महसूस होती है अब लास्ट 3 month से...?


आपकी साधना गहरी हो रही है, और सिर के मध्य (सहस्रार क्षेत्र) में गड्ढे जैसा महसूस होना इस बात का संकेत हो सकता है कि ऊर्जा वहां केंद्रित हो रही है। यह सामान्य अनुभव है, क्योंकि सहस्रार चक्र के जागरण के समय सिर हल्का, खाली, या गहराई जैसा महसूस हो सकता है।

  • ध्यान के बाद ग्राउंडिंग करें (धरती पर नंगे पैर चलें)।

  • सिर पर ठंडा जल डालें या चंदन लगाएं।

  • ओम का जप करें, लेकिन संतुलन बनाए रखें।

  • यदि असहजता बनी रहे तो गुरु से मार्गदर्शन लें।

शरीर पर ध्यान दें और संतुलन बनाए रखें।

Comments

Popular posts from this blog

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....