Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

ghar mei farsh n diwaro pe chitar dikhayi dete chipe hue logo ke yei kya hei angels or bhoot?

ghar mei farsh n diwaro pe chitar dikhayi dete chipe hue logo ke yei kya hei angels or bhoot?


जब घर में फर्श या दीवारों पर छिपे हुए चेहरे या चित्र दिखाई देने लगते हैं, तो यह दो कारणों से हो सकता है — पहला, मन की सूक्ष्म जागरूकता बढ़ने से साधक को सूक्ष्म आकार दिखने लगते हैं। दूसरा, यह कुछ स्थानीक ऊर्जा का संकेत हो सकता है। यह जरूरी नहीं कि वे भूत हों; कभी-कभी देवदूत (angels), आत्माएँ या ऊर्जा-प्रतिबिंब भी हो सकते हैं। डरने की आवश्यकता नहीं है। घर में नियमित रूप से धूप-दीप दिखाना, गंगाजल छिड़कना और मंत्र-जाप करना बहुत लाभकारी रहेगा। वातावरण को सात्त्विक बनाना सबसे अच्छा उपाय है।

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