Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

hamare denik jeevan me jo jeevan urja bahar ki taraf ja rahi hai aakho se kano se ya other kisi indriye se kya yahi urja kundilini urja hai ya kundilini urja alag hai jo muladhar chakra me soye huye hai plz bataye?

 hamare denik jeevan me jo jeevan urja bahar ki taraf ja rahi hai aakho se kano se ya other kisi indriye se kya yahi urja kundilini urja hai ya kundilini urja alag hai jo muladhar chakra me soye huye hai plz bataye?


हमारे दैनिक जीवन में जो ऊर्जा आँखों, कानों और अन्य इंद्रियों के माध्यम से बाहर की ओर प्रवाहित हो रही है, वह सामान्य जीवन ऊर्जा (pranic energy) है, जिसे हम सांस, भोजन, विचारों और क्रियाओं के माध्यम से उपयोग में लाते हैं। यह ऊर्जा कुंडलिनी ऊर्जा से अलग है। कुंडलिनी ऊर्जा वह दिव्य शक्ति है जो मूलाधार चक्र में सुप्त अवस्था में रहती है। जब साधक ध्यान, प्राणायाम या मंत्र साधना करता है, तब यह शक्ति जाग्रत होकर ऊपर की ओर चक्रों को भेदती है। कुंडलिनी ऊर्जा बहुत ही विशिष्ट, जाग्रत और परिवर्तनकारी शक्ति होती है।

Comments

Popular posts from this blog

guru jee kuch dino pahle tk third eye me Blue colour ki screen dikhai deti thi pr ab kabhi kabhi green.........

परमात्मा क्यों भेजता है आत्मा को संसार में?

मैं जब दीये को एक मिनट व देखु फिर आँखे बंद करू तो दिए की ज्योति मुझें आज्ञा चक्र पर दिखाई देती है.....