Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

mujhe7 chakras meditation karti hu aur mujhe tarah 2 ke sugandha ka anubhav hota hai ye koun se chakra ke activet hone ka asar hai ?

 mujhe7 chakras meditation karti hu aur mujhe tarah 2 ke sugandha ka anubhav hota hai ye koun se chakra ke activet hone ka asar hai ?


जब तुम 7 चक्रों का ध्यान करती हो और तुम्हें तरह-तरह की सुगंधों का अनुभव होता है, तो यह एक बहुत शुभ संकेत है। यह दर्शाता है कि तुम्हारे चक्र धीरे-धीरे सक्रिय हो रहे हैं और सूक्ष्म स्तर पर ऊर्जा जाग्रत हो रही है। विशेष रूप से सुगंधों का अनुभव अनाहत चक्र (हृदय चक्र) और आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य) के जागरण से जुड़ा होता है। अनाहत चक्र प्रेम, करुणा और दिव्य भावनाओं से जुड़ा होता है, जिससे दिव्य सुगंध आती है। यह अनुभव ईश्वरीय उपस्थिति का संकेत भी हो सकता है। साधना नियमित रूप से करती रहो, कृपा बनी रहेगी।

Comments

  1. Hello namaste sir mai apka chakra meditation karti hu to bahot jada restlessness and gussa ata hai ..bahot jada mood swings hote hai ...kya ye chakri ki sagali ke sanket hai? Ise balance kaise karna hai?kuki hisse me kabhi kabhi bahot logo ka man dukhaya jata hai aur fir uska pachava bhi hota hai

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