Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Sir dreem bilkul be zad nahi rahita kaya karna chaya ?

 Sir dreem bilkul be zad nahi rahita kaya karna chaya ?


अगर सपने बिल्कुल याद नहीं रहते, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है।
यह संकेत है कि तुम्हारी नींद गहरी हो रही है या मन अभी तक सूक्ष्म स्तर पर स्थिर नहीं हुआ है।
सपनों को याद करने के लिए सोने से पहले संकल्प करो — "मैं अपने सपनों को शांत मन से देखूंगा और याद रखूंगा।"
साथ ही, जागते ही बिना हिले-डुले कुछ क्षण आंखें बंद कर के पड़े रहो — सपनों की झलक वापस आ सकती है।

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