Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Agar sarir ke ander hi negative energy beith Gai hai jaisa ki mujhe back me bhut pain hota ????

 Agar sarir ke ander hi negative energy beith Gai hai jaisa ki mujhe back me bhut pain hota hai hamesha gande sapne bhi aate hai mai daily puja karti hu Bala ji ki lekin fir mere sath aesa ho hi rha hai uska Kay upaaya hai please bataiye .. ?



अगर शरीर में नकारात्मक ऊर्जा बैठ गई है, तो यह मानसिक, भावनात्मक या सूक्ष्म स्तर पर हुआ असंतुलन हो सकता है। पीठ में लगातार दर्द और गंदे सपने इसका संकेत हैं। उपाय के रूप में रोज़ सूर्य नमस्कार करें, कमर की ऊर्जा खोलने के लिए। स्नान से पहले सरसों के तेल में थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर शरीर पर मलें। रोज़ हनुमान चालीसा और अर्जुन की गीता में बताई गई श्लोक का पाठ करें। रात्रि को सोते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करते हुए सोएं। साथ ही, सोने से पहले कमरे में कपूर और लौंग जलाएं।

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