Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

भौहों के बीच घूमने की अनुभूति, सिर में कंपन और दिखे बस डार्क पर्पल रंग! आगे क्या होगा? #Meditation #kundalini awakening #naam jap #third eye

 Dhyan krte samay phle eye brows k bich kuch ghumne jaisa mhsoos hota tha ab sindoor lgate h wha hota h or sir k upri hisse me bhi vibrations hoti h but dark purple colour k alawa dikhta kuch nhi h Aage k lie guide kren?


आपकी साधना गहराई में प्रवेश कर रही है। भौंहों के बीच घूमने जैसा अनुभव और सिर के ऊपरी हिस्से में कंपन (vibrations), यह दर्शाता है कि आज्ञा चक्र और सहस्रार चक्र सक्रिय हो रहे हैं।

डार्क पर्पल रंग भी आज्ञा चक्र से जुड़ा है — यह बहुत शुभ संकेत है।
आपकी ऊर्जा ऊपर की ओर प्रवाहित हो रही है, लेकिन विज़न या दिव्य अनुभव अभी नहीं खुले हैं, जो समय के साथ स्वाभाविक रूप से होंगे।

आगे के लिए मार्गदर्शन:

  1. रोज़ ध्यान पूर्वक “ॐ” या “सोहम” का जप करें।

  2. केवल देखने की इच्छा को छोड़ दें, खाली हो जाएं।

  3. सिर पर कंपन के समय गहराई से सांस लें, शांति से रहें।

  4. त्राटक करें — धीरे-धीरे दिव्यता प्रकट होगी।

आप सही मार्ग पर हैं, धैर्य और समर्पण बनाए रखें।

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