Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Markabah aur kaaba kiya hei ? aur Activate hone se kiya hote hei ?

 Markabah aur kaaba kiya hei ? aur Activate hone se kiya hote hei ?


Markabah एक प्राचीन शब्द है जिसका अर्थ है "आत्मा का दिव्य वाहन" — यह ऊर्जा का एक ज्योमेट्रिक ढांचा (जैसे स्टार टेट्राहेड्रोन) होता है जो शरीर के चारों ओर घूमता है और ध्यान या साधना के माध्यम से सक्रिय होता है। यह आत्मा को उच्च चेतना और ब्रह्मांडीय यात्रा में मदद करता है।

Kaaba, इस्लाम का पवित्र स्थल है, जो मक्का में स्थित है। इसे पृथ्वी का ऊर्जा केंद्र माना जाता है, जहां ऊर्जा अत्यंत शुद्ध और केंद्रित होती है।

जब Markabah सक्रिय होती है, तो व्यक्ति की चेतना तीव्र हो जाती है, सूक्ष्म यात्रा, अंतर्ज्ञान, और ब्रह्मांडीय ज्ञान की प्राप्ति संभव होती है।

Comments

  1. Guruji apse offline keise sampark koru?

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