Naad ko drasta bhav se sune ya sadharan tarike se

 नाद को द्रष्टा भाव से सुनना ही बेहतर माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप नाद को सुनने की कोशिश या उसमें हस्तक्षेप न करें, बल्कि शांत होकर केवल साक्षी बनकर उसे सुनें। ध्यान को नाद पर टिकाएँ, लेकिन यह अपेक्षा न रखें कि कोई विशेष ध्वनि अवश्य सुनाई दे। नाद तेज हो, धीमा हो, बदलता रहे या कुछ समय के लिए बंद हो जाए—हर स्थिति में केवल साक्षी बने रहें। उसे पकड़ने, बढ़ाने या उसका अर्थ निकालने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे मन की चंचलता कम होने पर सूक्ष्म ध्वनि अधिक स्पष्ट अनुभव हो सकती है। यही द्रष्टा भाव की साधना है।

Sir phele hume akho pare lale rang dikhai deta tha lekin 2024 se rang hate gaya..................

 Sir phele hume akho pare lale rang dikhai deta tha lekin 2024 se rang hate gaya ek dum bhada sa rang dikhai deta hai sabhi rang ka mix pehle hum uthte bethate din rate hanuman chalisa padhte the pare 2024 ki suruvat se hanuman chalisa padh nahi pate kya kare sir app bata de ?


आपके अनुभव यह संकेत देते हैं कि आपके अंदर आध्यात्मिक परिवर्तन हो रहे हैं। पहले लाल रंग और फिर सभी रंगों का एक साथ दिखना ऊर्जा जागरण (चक्र एक्टिवेशन) का संकेत हो सकता है। पहले आप उत्साह से हनुमान चालीसा पढ़ते थे, लेकिन 2024 से रुकावट आना मानसिक, भावनात्मक या ऊर्जात्मक असंतुलन का कारण हो सकता है। कभी-कभी ऊर्जाओं का बदलाव हमें विचलित करता है। घबराएं नहीं। प्रतिदिन थोड़ा समय मौन में बैठें, लंबी गहरी सांस लें, और "राम" नाम का जप करें। धीरे-धीरे आपका मन स्थिर होगा और आप फिर से भक्ति और साधना में लौट पाएंगे।

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