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mera left side aur right side balance nhi ho rhi aur kundalini shakti apn

 mera left side aur right side balance nhi ho rhi aur kundalini shakti apne aap ek side atak jati hai. siddhi bohot strong ho gyi hai but balance nhi banana aa rha सबसे पहले घबराएँ नहीं। शरीर के दोनों ओर असंतुलन या ऊर्जा एक तरफ अटकने जैसा अनुभव होने पर इसे तुरंत कुण्डलिनी या सिद्धि का संकेत न मानें। अभी कुण्डलिनी जागरण के तीव्र अभ्यास, जोरदार प्राणायाम और बंध रोककर सामान्य श्वास के साथ सहज रहें। भोजन, नींद और दिनचर्या नियमित रखें तथा ध्यान में किसी एक ओर ऊर्जा खींचने का प्रयास न करें। यदि कमजोरी, सुन्नपन, दर्द या संतुलन बिगड़ रहा है, तो चिकित्सकीय जाँच अवश्य करवाएँ। साधना में स्थिरता, स्वास्थ्य और विवेक सबसे महत्वपूर्ण हैं। 🙏

Mere andar garmi jyada bd gae h.kya kru ye kya meditation se h ?

 Mere andar garmi jyada bd gae h.kya kru ye kya meditation se h .pls reply.heart beat b sunae deti h n gardan ke peechle bhag me gudgudi b hoti h.kaun sa chakra khul chuka h ye b batae pls.? आपके भीतर जो गर्मी बढ़ गई है, हृदय की धड़कन सुनाई देती है, और गर्दन के पीछे गुदगुदी हो रही है—ये सभी संकेत ऊर्जा जागरण (Kundalini Activation) के हैं। यह संभव है कि आपका अनाहत (हृदय) चक्र और विशुद्ध (गला) चक्र सक्रिय हो रहे हैं। गर्मी – यह ऊर्जा का ऊपर उठना दर्शाता है, विशेषतः अनाहत चक्र के आसपास। दिल की धड़कन सुनाई देना – यह अनाहत चक्र की संवेदनशीलता है। गर्दन की गुदगुदी – यह विशुद्ध चक्र की ऊर्जा है। क्या करें: ठंडी प्राणायाम विधियाँ करें, जैसे शीतली/शीतकारी। जल का सेवन बढ़ाएं। ध्यान में “ॐ” का उच्चारण करें, और शरीर को सहज छोड़ दें। जब भी असहजता हो, ध्यान कुछ दिनों के लिए कम कर दें। यह प्रक्रिया प्राकृतिक है, डरें नहीं। संयम, संतुलन और श्रद्धा बनाए रखें।

Gurudev Hastmethun ka dhyaan aur kundalini pe kya prabhav padta hai? Koi ?

Gurudev Hastmethun ka dhyaan aur kundalini pe kya prabhav padta hai? Koi sadhak spirituality pe chal raha ho aur kuch time se hastmethun na kiya ho aur urja agya chakra tak mehsoos hone lage toh masturbuating se kya ho jayega aur spirituality pe kya asar hoga?  आत्मचेतना और उर्जा साधना के मार्ग में ब्रह्मचर्य का बड़ा महत्व होता है। जब कोई साधक हस्तमैथुन छोड़ देता है, तो उसकी ऊर्जा ऊपर उठने लगती है—विशेषकर मूलाधार से आज्ञा चक्र तक। यह ऊर्जा ही कुण्डलिनी है। यदि इस स्थिति में फिर से हस्तमैथुन किया जाए, तो ऊर्जा नीचे खिंच जाती है, और साधना में बना हुआ संतुलन टूट सकता है। इससे ध्यान भटकता है, थकावट, ग्लानि, और आध्यात्मिक प्रगति में रुकावट आ सकती है। इसलिए संयम बनाए रखना श्रेष्ठ है। यदि वासना उठे, तो तुरंत जप, ध्यान या प्राणायाम करें। ऊर्जा को बदल देना ही असली तप है।

कई दिनों से मेरे मुलाधर्, रीड के सबसे निचले हिस्से मे और गुदादुवार मे मीठा मीठा तेज दर्द बन रहा है, जिसकी वजह से मैं बहुत परेशां हू ?

 गुरुजी कई दिनों से मेरे मुलाधर्, रीड के सबसे निचले हिस्से मे और गुदादुवार मे मीठा मीठा तेज दर्द बन रहा है, जिसकी वजह से मैं बहुत परेशां हू, कृपया मार्ग दर्शन कीजिये 🙏 यह अनुभव आपके मूलाधार चक्र के जागरण और ऊर्जा के सक्रिय होने का संकेत हो सकता है। मूलाधार में ऊर्जा के संचार से वहाँ खिंचाव, मीठा दर्द या कंपन महसूस होना सामान्य है, लेकिन अगर यह लगातार तेज़ हो रहा है, तो आपको ध्यानपूर्वक संतुलन बनाना ज़रूरी है। मार्गदर्शन: रोज़ जमीन पर बैठकर "लं" बीज मंत्र का उच्चारण करें। अधिक देर ध्यान करने से बचें — शुरुआत में 10-15 मिनट पर्याप्त है। हल्के व्यायाम और रीढ़ की हड्डी की स्ट्रेचिंग करें। गुदाद्वार में असहजता होने पर अश्विनी मुद्रा करें। अगर दर्द असहनीय हो, तो चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

Sir phele hume akho pare lale rang dikhai deta tha lekin 2024 se rang hate gaya..................

 Sir phele hume akho pare lale rang dikhai deta tha lekin 2024 se rang hate gaya ek dum bhada sa rang dikhai deta hai sabhi rang ka mix pehle hum uthte bethate din rate hanuman chalisa padhte the pare 2024 ki suruvat se hanuman chalisa padh nahi pate kya kare sir app bata de ? आपके अनुभव यह संकेत देते हैं कि आपके अंदर आध्यात्मिक परिवर्तन हो रहे हैं। पहले लाल रंग और फिर सभी रंगों का एक साथ दिखना ऊर्जा जागरण (चक्र एक्टिवेशन) का संकेत हो सकता है। पहले आप उत्साह से हनुमान चालीसा पढ़ते थे, लेकिन 2024 से रुकावट आना मानसिक, भावनात्मक या ऊर्जात्मक असंतुलन का कारण हो सकता है। कभी-कभी ऊर्जाओं का बदलाव हमें विचलित करता है। घबराएं नहीं। प्रतिदिन थोड़ा समय मौन में बैठें, लंबी गहरी सांस लें, और "राम" नाम का जप करें। धीरे-धीरे आपका मन स्थिर होगा और आप फिर से भक्ति और साधना में लौट पाएंगे।

Aagya chakra p kitna der dhyaan krna chahiye.. lagatar 2 ghnte kr skate h ?

 Aagya chakra p kitna der dhyaan krna chahiye.. lagatar 2 ghnte kr skate h ? आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra) पर ध्यान करना मानसिक स्पष्टता, अंतर्ज्ञान और आत्मिक जागरूकता बढ़ाने में सहायक होता है। शुरुआत में 10 से 20 मिनट का ध्यान पर्याप्त होता है, जिससे शरीर और मन इसकी ऊर्जा के साथ सामंजस्य बना सकें। जैसे-जैसे अभ्यास गहरा होता जाए, समय बढ़ाया जा सकता है। यदि आप मानसिक रूप से स्थिर हैं और कोई नकारात्मक लक्षण (जैसे सिरदर्द, बेचैनी या भ्रम) अनुभव नहीं हो रहा है, तो आप लगातार 2 घंटे भी ध्यान कर सकते हैं। ध्यान रखें कि ध्यान सहज, शांतिपूर्ण और संतुलन में होना चाहिए, न कि जबरदस्ती या थकावटपूर्ण।

ब्रह्ममुहूर्त की रहस्यमयी कथा | रोज सुबह 3 से 6 उठकर 7 दिन तक करें यह काम फिर देखे चमत्कार।?

 ब्रह्ममुहूर्त की रहस्यमयी कथा | रोज सुबह 3 से 6 उठकर 7 दिन तक करें यह काम फिर देखे चमत्कार।? भारतीय योगशास्त्र, आयुर्वेद और वेदों में ब्रह्ममुहूर्त को अत्यंत शुभ, पवित्र और रहस्यमयी समय बताया गया है। यह वह समय है जब सृष्टि की चेतना उच्चतम स्तर पर होती है, वातावरण में शांति और ऊर्जा दोनों सर्वोच्च रूप में विद्यमान होती हैं। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर विशेष साधना करे, तो सात ही दिन में उसका जीवन, चित्त और ऊर्जा स्तर पर आश्चर्यजनक परिवर्तन आने लगता है। आज हम ब्रह्ममुहूर्त की रहस्यमयी कथा, वैज्ञानिक पक्ष, आध्यात्मिक महत्व और 7 दिनों की दिव्य साधना का रहस्य साझा करेंगे। 🔱 ब्रह्ममुहूर्त क्या है? ब्रह्ममुहूर्त एक वैदिक समयावधि है, जो सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पूर्व प्रारंभ होती है। इसका समय आमतौर पर प्रातः 3:30 से 5:30 या 6:00 बजे तक होता है। यह समय न तो पूर्ण रूप से रात्रि होता है, न ही पूर्ण रूप से दिन — यह सन्धि का काल होता है। इस समय को देवताओं का काल कहा गया है क्योंकि वातावरण में सात्विकता अधिक होती है और तमोगुण सबसे न्यूनतम अवस्था में होता है। 📜 ब्रह...

Agya chakar par sone ke samay ko chhod kar har samay thanda -garam khichav and vivrat hota hai ?

 Agya chakar par sone ke samay ko chhod kar har samay thanda -garam khichav and vivrat  hota hai ? आपके आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra) पर ठंडे-गर्म खिचाव और विव्रत का अनुभव एक सामान्य संकेत हो सकता है कि यह चक्र सक्रिय हो रहा है। इस चक्र की स्थिति में अक्सर शारीरिक, मानसिक और ऊर्जा स्तर पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं होती हैं। ठंडा या गरम अनुभव, खिचाव और विव्रतता का अर्थ हो सकता है कि आपकी ऊर्जा की धाराएं इस क्षेत्र में समायोजित हो रही हैं। यह अनुभव तब होता है जब आप ध्यान या साधना करते हैं और चक्रों की ऊर्जा सक्रिय होती है। यदि यह असहज हो, तो योग या प्राणायाम से संतुलन बनाए रखना मददगार हो सकता है।

Guruji mere aagya chakra per har roj bahut jyada thandak mahsus Hoti hai bataiye kyon Uttar dijiye?

 Guruji mere aagya chakra per har roj bahut jyada thandak mahsus Hoti hai bataiye kyon Uttar dijiye? आपके आज्ञा चक्र (Third Eye Chakra) पर ठंडक का अनुभव एक सकारात्मक संकेत हो सकता है। जब इस चक्र पर ध्यान और साधना होती है, तो ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है, और यह ठंडक या शीतलता का अनुभव देता है। यह आपके आंतरिक ध्यान, उच्च मानसिक स्थिति और आध्यात्मिक जागरण का परिणाम हो सकता है। आज्ञा चक्र की सक्रियता से मानसिक स्पष्टता, अंतर्दृष्टि और उच्च संवेदनाओं में वृद्धि होती है। ठंडक का अनुभव इस बात का संकेत हो सकता है कि आपकी ऊर्जा सक्रिय हो रही है और आप आंतरिक ज्ञान की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

Sir mai aapse ek prashn puchna chahti hun ki kya bina Guru k koi mantra Jaap ker sakte hai kya kripa margdarshan kare ?

 Sir mai aapse ek prashn puchna chahti hun ki kya bina Guru k koi mantra Jaap ker sakte hai kya kripa margdarshan kare ? जी हां, आप बिना गुरु के भी मंत्र जप कर सकती हैं, लेकिन गुरु का मार्गदर्शन बहुत महत्वपूर्ण होता है। गुरु के बिना मंत्र जप करना संभव है, लेकिन गुरु की उपस्थिति से जप में गहरी समझ और ऊर्जा की शक्ति मिलती है। गुरु आपके ध्यान को सही दिशा में मार्गदर्शन देते हैं और मंत्र के सही उच्चारण और प्रभाव को समझाते हैं। गुरु की कृपा से आत्मा का ऊंचा आध्यात्मिक विकास होता है। आप ध्यान और भक्ति के साथ मंत्र जप कर सकती हैं, लेकिन गुरु का आशीर्वाद और मार्गदर्शन बहुत लाभकारी होता है।

mujh gold chaker dekhta h To kon sa chaker jagerti h?

 mujh gold chaker dekhta h To kon sa chaker jagerti h? जब आप सोने (gold) के रंग का चक्र देखते हैं, तो यह संभवतः आपके स्वाधिष्ठान चक्र (Sacral Chakra) या सहस्रार चक्र (Crown Chakra) के सक्रिय होने का संकेत हो सकता है। स्वाधिष्ठान चक्र में जल और रचनात्मक ऊर्जा का तत्व होता है, और यह पीला, नारंगी या सुनहरा रंग दिखा सकता है। दूसरी ओर, सहस्रार चक्र जो सिर के शीर्ष पर स्थित होता है, आमतौर पर बैंगनी, सफेद या सुनहरे रंग में चमक सकता है। इन चक्रों का जागरण मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में एक संकेत होता है, जो आपके ऊर्जा केंद्रों के संतुलन को दर्शाता है।

Brahamrandhra kya hai ?

 Brahamrandhra kya hai ? ब्रह्मरंध्र वह स्थान है जो हमारे सिर के शीर्ष, यानी सहस्रार चक्र के पास स्थित होता है। यह आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। ब्रह्मरंध्र को साधक के सर्वोच्च चैतन्य केंद्र के रूप में माना जाता है, जहाँ ध्यान और साधना के द्वारा उच्चतम आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। यह स्थान शारीरिक और आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र के रूप में कार्य करता है। जब ब्रह्मरंध्र सक्रिय होता है, तो व्यक्ति को गहरी ध्यान अवस्था और दिव्य अनुभव प्राप्त होते हैं। इसे सच्चे ज्ञान और अद्वितीय चेतना के स्रोत के रूप में समझा जाता है।

mai dhyan karti hu Kya bhaiya kundalini Shakti ulti bhi ho sakti hai agar hoti hai to use kaise theek Kiya jata hai please bhai bata dijiye

 mai dhyan karti hu Kya bhaiya kundalini Shakti ulti bhi ho sakti hai agar hoti hai to use kaise theek Kiya jata hai please bhai bata dijiye ? कुंडलिनी शक्ति का उल्टा हो जाना एक दुर्लभ और जटिल विषय है। यह स्थिति तब उत्पन्न हो सकती है जब ऊर्जा असंतुलित हो जाती है। यदि यह उल्टी हो जाए तो इससे मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए शांति, ध्यान और प्राचीन योग विधियों का अभ्यास करना चाहिए। कुंडलिनी के संतुलन के लिए योग और प्राणायाम की उचित विधियों का पालन करना जरूरी है। इसके साथ ही एक योग्य गुरु से मार्गदर्शन प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है। ये प्रक्रियाएं कुंडलिनी को फिर से सही दिशा में प्रवाहित करने में मदद करेंगी।

तीसरी आंख पर तेज़ ऊर्जा का अहसास? इसका रहस्य जान लीजिए ? #Meditation #kundalini awakening #naam jap

 Mere aagya chkra pr energy feel hoti hai reason please ? जब आप आज्ञा चक्र (Third Eye) पर ऊर्जा महसूस करती हैं, तो इसका अर्थ है कि आपका आज्ञा चक्र सक्रिय हो रहा है। यह चक्र इंटूइशन (intuition) , ध्यान (concentration) , और आध्यात्मिक दृष्टि (spiritual vision) से जुड़ा है। जब इस चक्र पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो वहां ऊर्जा का प्रवाह होने लगता है, जिससे हल्की कंपन, गर्माहट या अन्य संवेदनाएं हो सकती हैं। यह संकेत है कि आपकी साधना गहरी हो रही है, और आपकी आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर आप आगे बढ़ रही हैं। ध्यान और साधना में और गहराई लाएं, ऊर्जा और अनुभव और स्पष्ट होंगे।

meri urja ko rok Di gai hai tantrikon piche pade Hain ab main unse kaise ? #Meditation #kundalini awakening #naam jap

 meri urja ko rok Di gai hai tantrikon piche pade Hain ab main unse kaise ? भय और असहायता का भाव मत आने दो। तांत्रिक या नकारात्मक शक्तियाँ केवल तभी प्रभाव डालती हैं जब साधक भीतर से डरा, कमज़ोर या अस्थिर हो। सबसे पहले, अपनी ऊर्जा की रक्षा के लिए रोज़ ये करें: सुबह-शाम “ ॐ नमः शिवाय ” या “ राम राम ” का जप 108 बार करें। लाल चंदन या “रुद्राक्ष” धारण करें। ध्यान से पहले “ ॐ अपराजितायै नमः ” या “ काली दुर्गायै नमः ” मंत्र का जप करें। नींबू-लौंग रक्षा प्रयोग करें (जरूरत हो तो बताऊं कैसे)। कभी भी डर या क्रोध न आने दें — भय ऊर्जा को रोकता है। आपके भीतर शिवशक्ति है — कोई भी तांत्रिक शक्ति आपके पास नहीं टिक सकती । साधना और विश्वास बनाए रखें, आप पूरी तरह सुरक्षित हैं। नींबू-लौंग रक्षा प्रयोग विधि: सामग्री: 1 ताजा नींबू 4 लौंग अगरबत्ती या कपूर साफ स्थान विधि: नींबू को अपने सामने रखें। उसमें 4 लौंग इस प्रकार डालें कि वो क्रॉस (X) के आकार में हो। अब हाथ जोड़कर 3 बार कहें: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ काली दुर्गायै नमः” अब नींबू को अपने सिर के पास ...

ध्यान में दिखा पर्पल प्रकाश, फिर सपने में उसी से प्रकट हुए महादेव! क्या है इसका रहस्य? #Meditation #kundalini awakening #naam jap

  Dhyan krte samay jo purple color ka prakash dikhta h or usse vibhin shapes bnte rhte h Ase hi spne me mujhe un tarangon se dheere dheere Mahadev bnte hue dikhe or asa lag rha tha jaise wo koi partima nhi blki ak tej ho Sadhna me iska kya mhtaw h please btayen. ? ध्यान में बैंगनी (purple) प्रकाश दिखना और उससे आकृतियाँ बनना , यह आज्ञा चक्र की जागृति का स्पष्ट संकेत है। जब चित्त शांत होता है और ऊर्जा आज्ञा चक्र पर केंद्रित होती है, तब दिव्य रंग और रूप प्रकट होने लगते हैं। सपने में उन तरंगों से धीरे-धीरे महादेव का बनना , और उन्हें तेजस्वी रूप में देखना — यह बहुत उच्च और शुभ अनुभव है। इसका अर्थ है कि आपकी साधना में ईश्वरीय संपर्क स्थापित हो रहा है। यह भीतर की चेतना आपको दर्शन दे रही है। यह कोई सामान्य सपना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति है। महादेव का तेजस्वी रूप दिखना बताता है कि आपकी साधना सही दिशा में है और शिवतत्त्व आपके मार्गदर्शक बन चुके हैं । इस अनुभव के बाद नियमित ध्यान, श्रद्धा और निःस्वार्थ भक्ति बनाए रखें — आगे और गहन अनुभव होंगे।

क्या कभी गहरे dhyan मै कान बंद हो जाते है कुछ आवाज़ आती है किसी स ने पुकारा ये अनुभव सिर्फ एक बार हआ फिर nhi ऐसा सच या मन का भ्र्म ? #Meditation #kundalini awakening #naam jap #third eye

 क्या कभी गहरे dhyan मै कान बंद हो जाते है कुछ आवाज़ आती है किसी स ने पुकारा ये अनुभव सिर्फ एक बार हआ फिर nhi ऐसा सच या मन का भ्र्म? यह अनुभव ध्यान की गहराई में होने वाला एक सत्य संकेत है, न कि केवल मन का भ्रम। जब साधक गहरे ध्यान में प्रवेश करता है, तो बाहरी कानों की ध्वनियाँ बंद हो सकती हैं और अंदर की सूक्ष्म ध्वनियाँ सुनाई देती हैं — जिसे आनाहत नाद कहते हैं। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि कोई नाम लेकर पुकारता है , यह सूक्ष्म जगत से आने वाला संदेश हो सकता है — विशेषकर यदि वह आवाज एकदम स्पष्ट और जगा देने वाली हो। यह अनुभव एक बार हुआ और फिर नहीं हुआ — इसका कारण है कि आपका ध्यान उस गहराई तक दोबारा नहीं गया होगा। यह डरने का नहीं, बल्कि उन्नति का संकेत है। नियमित अभ्यास और समर्पण से ये अनुभव फिर होंगे।

भौहों के बीच घूमने की अनुभूति, सिर में कंपन और दिखे बस डार्क पर्पल रंग! आगे क्या होगा? #Meditation #kundalini awakening #naam jap #third eye

 Dhyan krte samay phle eye brows k bich kuch ghumne jaisa mhsoos hota tha ab sindoor lgate h wha hota h or sir k upri hisse me bhi vibrations hoti h but dark purple colour k alawa dikhta kuch nhi h Aage k lie guide kren? आपकी साधना गहराई में प्रवेश कर रही है। भौंहों के बीच घूमने जैसा अनुभव और सिर के ऊपरी हिस्से में कंपन (vibrations) , यह दर्शाता है कि आज्ञा चक्र और सहस्रार चक्र सक्रिय हो रहे हैं। डार्क पर्पल रंग भी आज्ञा चक्र से जुड़ा है — यह बहुत शुभ संकेत है। आपकी ऊर्जा ऊपर की ओर प्रवाहित हो रही है, लेकिन विज़न या दिव्य अनुभव अभी नहीं खुले हैं, जो समय के साथ स्वाभाविक रूप से होंगे। आगे के लिए मार्गदर्शन: रोज़ ध्यान पूर्वक “ॐ” या “सोहम” का जप करें। केवल देखने की इच्छा को छोड़ दें, खाली हो जाएं। सिर पर कंपन के समय गहराई से सांस लें, शांति से रहें। त्राटक करें — धीरे-धीरे दिव्यता प्रकट होगी। आप सही मार्ग पर हैं, धैर्य और समर्पण बनाए रखें।

Guruji bahut drd hota urja chalti to rid ki haddi me drd hota gale me drd hota estrh kyo hota ? #Meditation #kundalini awakening #naam jap #third eye

 Guruji bahut drd hota urja chalti to rid ki haddi me drd hota gale me drd hota estrh kyo hota ? जब साधना में ऊर्जा (कुंडलिनी) जाग्रत होकर ऊपर की ओर बढ़ती है, तो वह रीढ़ की हड्डी, गला, और अन्य चक्रों से होकर गुजरती है। इस यात्रा में यदि शरीर शुद्ध न हो या चक्र अवरुद्ध हों, तो दर्द, खिंचाव या जलन जैसी पीड़ाएँ अनुभव होती हैं। रीढ़ में दर्द दिखाता है कि ऊर्जा सुषुम्ना में प्रवाहित हो रही है। गले में दर्द इंगित करता है कि विशुद्ध चक्र पर रुकावट है — यह बोलने, सत्य कहने या भावनाओं को दबाने से जुड़ा होता है। इसका समाधान: रीढ़ सीधी रखें और रोज हल्के प्राणायाम करें। ध्यानपूर्वक “हं” बीज मंत्र का जप करें। गर्म पानी पीएं, विश्राम करें। यह सब अस्थायी है, धीरे-धीरे ठीक होगा। डरें नहीं, यह उन्नति का संकेत है।

मेरा प्रश्न है कि "' आत्मा का विलय "' या "' आत्मा में विलय "' होने से क्या तात्पर्य है ? जब कि , मैं ही आत्मा हूं। फिर " मैं आत्मा " किसमें या कहॉं विलिन होगा ? #Meditation #kundalini awakening #naam jap #third eye

 मेरा प्रश्न है कि "' आत्मा का विलय "' या "' आत्मा में विलय "' होने से क्या तात्पर्य है ? जब कि , मैं ही आत्मा हूं। फिर " मैं आत्मा " किसमें या कहॉं विलिन होगा ? आपका प्रश्न बहुत गूढ़ और आत्मचिंतन से भरा है। आपने सही कहा कि "मैं ही आत्मा हूं" , लेकिन "आत्मा का विलय" या "आत्मा में विलय" का तात्पर्य आत्मा के नहीं, अहंकार और अवास्तविक 'मैं' के विलय से है। जब कहा जाता है कि आत्मा का विलय हुआ — इसका अर्थ है कि व्यक्तिगत चेतना (जीवभाव) सर्वव्यापक चेतना (परमात्मा) में लीन हो गई। यह वह अवस्था है जब "मैं" — जो शरीर, मन, नाम, रूप से जुड़ा है — पूरी तरह समाप्त हो जाता है, और केवल शुद्ध अस्तित्व, शुद्ध आत्मा शेष रह जाती है। दूसरे शब्दों में, विलय का अर्थ है "स्वत्व का विसर्जन" — जब साधक यह अनुभव करता है कि न मैं शरीर हूं, न मन, न विचार — केवल एक ही सत्ता है: "सच्चिदानंद" । तब "मैं आत्मा हूं" यह भाव भी मिट जाता है — और केवल मौन, शांति और एकत्व शेष रह जाता है...

योगासन ताकतवर या मुद्रा? असली शक्ति किसमें है? जानिए गुरुजी का रहस्यभरा उत्तर! ? #Meditation #kundalini awakening #naam jap #third eye

 yogasan aur mudra me sabse pawerful kaun hai mudra ya yogasan guruji ? योगासन और मुद्रा दोनों ही साधना के लिए अत्यंत शक्तिशाली हैं, पर इनका प्रभाव अलग-अलग स्तरों पर होता है। योगासन शरीर को शुद्ध, मजबूत और स्थिर बनाते हैं — जिससे ध्यान में बैठना आसान होता है। मुद्राएं प्राणशक्ति (ऊर्जा) को नियंत्रित और जाग्रत करती हैं — ये सूक्ष्म स्तर पर काम करती हैं। अगर आप ऊर्जा जागरण और भीतर की यात्रा पर हैं, तो मुद्राएं अधिक शक्तिशाली सिद्ध हो सकती हैं। लेकिन यदि शरीर अस्वस्थ या अशांत है, तो पहले योगासन आवश्यक हैं। सही परिणाम के लिए दोनों का संतुलित प्रयोग श्रेष्ठ है।

घंटी की आवाज़ आती है, सहस्रार में टिक-टिक होती है लेकिन अब तक कुछ दिखाई क्यों नहीं देता? #Meditation #kundalini awakening #naam jap #third eye

 Maine Kai bar aapko comment Kiya ki mera sahastra chakkar mein bhi tik tik hoti hai mujhe ghante ki awaaz bhi sunti hai lekin Aaj Tak mujhe dikhai kuchh nahin Diya main Kahan Tak pahunchi hun yah bataiye Jara aur yah kya hai kyon dikhai nahin deta? आपने जो अनुभव किया है — सहस्रार चक्र में टिक-टिक की अनुभूति और घंटे की आवाज सुनाई देना — ये दोनों बहुत गहरे और शुभ संकेत हैं। इसका अर्थ है कि आपकी ऊर्जा अब शीर्ष (सहस्रार) तक पहुँच चुकी है और वहाँ सक्रियता हो रही है। सहस्रार पर जब ऊर्जा पहुँचती है, तो आकाशीय ध्वनियाँ (Anahat Naad) सुनाई देना आम बात है। लेकिन अभी तक कुछ दिखाई न देना इस बात का संकेत है कि आपकी अंतर्दृष्टि (तीसरी आँख) पूरी तरह खुली नहीं है। इसके लिए धैर्य रखें। ये यात्रा धीमी, पर गहरी होती है। आप अब तक काफी ऊँचाई तक पहुँच चुकी हैं। अब ज़रूरत है — नियमित ध्यान की, भावशुद्धि की, और “मैं कुछ देखूं” वाली इच्छा को त्यागने की। जब मन शांत और खाली होगा, तब दर्शन भी अपने आप होने लगेंगे। आप सही मार्ग पर हैं, बस प्रेमपूर्वक आगे बढ़ती रहिए।

ध्यान में गर्दन अपने आप घूमने लगे तो समझ लो कुछ बड़ा हो रहा है! इसका असली रहस्य जानिए ?

 Kripya Mera bhi Uttar dijiye main jab Dhyan karta hun to Mera gardan gol gol ghumta hai left right automatic kriya hoti hai aur FIR kuchh der sidha hokar gardan mein khinchav hota hai Aisa lagta hai kuchh upar jaane ka prayas kar raha hai isko ham kaise aasan banaen yah Kai dinon se ho raha hai kintu upar Pravesh nahin kar pa raha hai sharir bilkul niche se ekadam halki Ho jaati hai gardan mein akdan rahti hai aur is tarah ki prakriya hoti hai? जब आप ध्यान करते हैं और गर्दन अपने-आप गोल-गोल घूमती है, तो यह कुंडलिनी जागरण की स्वाभाविक प्रक्रिया (स्वचालित क्रियाएं / spontaneous kriyas) हो सकती है। यह दर्शाता है कि आपकी ऊर्जा सक्रिय हो रही है और ऊपर की ओर जाने का प्रयास कर रही है। गर्दन में खिंचाव और अकड़न इस ऊर्जा की चढ़ाई के कारण होती है, जो विशुद्ध चक्र और आज्ञा चक्र की ओर बढ़ रही है। इस अनुभव को आसान बनाने के लिए: रीढ़ सीधी रखें और गर्दन को ढीला छोड़ें, रोकने की कोशिश न करें। धीरे-धीरे गहरी श्वास लें और छोड़ें — यह ऊर्जा को संतुलन देता है। "सोहम" या "ओम...

Ram Ram sir..dhyan me body pichhe kiyu jati hai? Pls answer this question ?

 Ram Ram sir..dhyan me body pichhe kiyu jati hai? Pls answer this question? ध्यान के दौरान शरीर का पीछे जाना या झुकना एक सामान्य अनुभव है, जो तब होता है जब ऊर्जा (pranic energy) आपके शरीर में गहरी तरह से प्रवाहित हो रही होती है। यह संकेत हो सकता है कि आपकी ऊर्जा उर्ध्व (upward) यात्रा कर रही है, और शरीर उस ऊर्जा के प्रभाव से झुक सकता है। ऐसा अक्सर तब होता है जब सहस्रार चक्र (Crown Chakra) और आज्ञा चक्र (Third Eye) सक्रिय होते हैं। उपाय : ध्यान के दौरान शरीर को स्थिर और सीधा रखें। श्वास पर ध्यान केंद्रित करें, ताकि शरीर का संतुलन बना रहे।

Sir mujhe Meg dhanush Jese and gudabi dikhta hai Konsa chakra jagrut ?

 Sir mujhe Meg dhanush Jese and gudabi dikhta hai Konsa chakra jagrut? जब आपको मेघ धनुष (इंद्रधनुष) जैसा या गुलाबी रंग दिखाई देता है, तो यह संभावना है कि आपका अनाहत चक्र (Heart Chakra) जागृत हो रहा है। गुलाबी रंग खासतौर पर प्रेम, करुणा और संतुलन से जुड़ा होता है, जो अनाहत चक्र से संबंधित है। यह चक्र जब सक्रिय होता है, तो हम आंतरिक शांति, प्रेम और सहानुभूति का अनुभव करते हैं। उपाय : अनाहत चक्र के लिए हरी रंग की वस्तुएं रखें और ध्यान में उस पर ध्यान केंद्रित करें। नियमित रूप से प्रणाम मंत्र का जाप करें।

Mene Shiv Ji ko man se apna Guru maan liya hai. Kuch aur offically karne ki zaroorat hai???

 Mene Shiv Ji ko man se apna Guru maan liya hai. Kuch aur offically karne ki zaroorat hai??? अगर आपने मन से भगवान शिव को अपना गुरु मान लिया है, तो यह एक बहुत ही पवित्र और सशक्त संबंध है। आधिकारिक रूप से कुछ करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आध्यात्मिक मार्ग में सबसे महत्वपूर्ण है आपके दिल की शुद्धता और विश्वास। आप नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा, ध्यान, और मंत्र जाप करके इस संबंध को और गहरा कर सकती हैं। बस अपने गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण और भक्ति बनाए रखें।

Har har Mahadev Aaj kal sir jo bhi cheez ki mujhe jarurat mahsoos hoti hai wo cheez meri taraf aa jati hai kisi bhi jarye se ye kya hai sir ?

 Har har Mahadev Aaj kal sir jo bhi cheez ki mujhe jarurat mahsoos hoti hai wo cheez meri taraf aa jati hai kisi bhi jarye se ye kya hai sir ? जब आपकी आवश्यकता अनुसार चीजें स्वतः आपकी ओर आने लगती हैं, यह आपके भीतर की ऊर्जा और ब्रह्मांडीय चेतना के साथ तालमेल (alignment) का संकेत है। यह "संकल्प शक्ति" (power of intention) और "आकर्षण का नियम" (Law of Attraction) का प्रभाव हो सकता है, जो साधना, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा के कारण जाग्रत होता है। जब चित्त शुद्ध होता है और साधक का मन शांत होता है, तो ब्रह्मांड उसके संकल्पों का समर्थन करता है। सुझाव : इस कृपा के लिए आभार प्रकट करें। संकल्प शुद्ध और सेवा-भाव से करें। साधना नियमित रखें – यह स्थिति बनी रहेगी।

Dhyan Mein Anubhav Kyon Nahin ho rahe pahle Jaise usko Kaise laen Dobara se ?

 Dhyan Mein Anubhav Kyon Nahin ho rahe pahle Jaise usko Kaise laen Dobara se? ध्यान में पहले जैसे अनुभव न होना अक्सर दो कारणों से होता है: या तो मन में अपेक्षा और焦虑 बढ़ गई है, या ऊर्जा असंतुलित हो गई है। जब हम अनुभव की इच्छा लेकर ध्यान करते हैं, तो मन शांत नहीं हो पाता और गहराई छिन जाती है। उपाय : बिना अपेक्षा के, केवल "साक्षी भाव" से ध्यान करें। सुबह या ब्रह्म मुहूर्त में ध्यान करें – वह समय प्रभावी होता है। नियमित प्राणायाम (विशेष रूप से अनुलोम-विलोम) करें – ऊर्जा संतुलित होगी। 108 बार "ॐ" का जाप करें – चित्त शुद्ध होगा।

dhyan me hat or pair ke talve me kuch ghumta hua mahsus hona gol gol kya hai?

 dhyan me hat or pair ke talve me kuch ghumta hua mahsus hona gol gol kya hai? ध्यान के समय हाथों और पैरों के तलवों में गोल-गोल कुछ घूमता हुआ महसूस होना सूक्ष्म ऊर्जा (pranic energy) के सक्रिय होने का संकेत है। यह ऊर्जा जब नाड़ियों में प्रवाहित होती है, तो खासकर हथेली और तलवों जैसे संवेदनशील बिंदुओं पर चक्रों के समान घूमती हुई अनुभूति देती है। यह सकारात्मक संकेत है कि आपकी साधना प्रभावी है और ऊर्जा जाग्रत हो रही है। उपाय : ऊर्जा को संतुलन में लाने के लिए अनुलोम-विलोम करें। ध्यान के अंत में ज़मीन से जुड़ने के लिए थोड़ी देर तक ध्यानपूर्वक सांस लें। नियमित रूप से धरती पर नंगे पाँव चलें।

aathey ke.shaid me kid jaisha rengana pichey bhi rengta hai?

 aathey ke.shaid me kid jaisha rengana pichey bhi rengta hai? माथे के अंदर या सिर के पिछले भाग में कीड़े जैसे रेंगने का अनुभव ऊर्जा के सूक्ष्म प्रवाह का संकेत हो सकता है, खासकर जब आज्ञा चक्र और सहस्रार चक्र सक्रिय हो रहे हों। यह अनुभव नाड़ियों के जागरण या आध्यात्मिक ऊर्जा के असंतुलन से होता है। डरने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन ऊर्जा को संतुलित करना आवश्यक है। उपाय : रोज़ अनुलोम-विलोम 10 मिनट करें। “ॐ” का जप धीमे और गहराई से करें। अधिक ध्यान न करें जब तक यह अनुभव शांत न हो जाए। नींद पूरी लें, जल का सेवन बढ़ाएं।

Open 3rd eye create pain guruji or not?

 Open 3rd eye create pain guruji or not? हाँ, Third Eye (आज्ञा चक्र) के जागरण के समय कुछ लोगों को सिर में दर्द, आंखों पर दबाव, या माथे में जलन जैसा अनुभव हो सकता है। यह दर्द ऊर्जा के प्रवाह से होता है, जब नाड़ियाँ और चक्र पूरी तरह शुद्ध या संतुलित नहीं होते। यह सामान्य है और डरने की आवश्यकता नहीं है। उपाय : अनुलोम-विलोम करें – ऊर्जा संतुलित होगी। माथे पर ठंडी पट्टी रखें। “ॐ” का जप करें – यह आज्ञा चक्र को शांत करता है। जब तक दर्द शांत न हो, visualization न करें।